दो चोटी


“दो चोटी” शब्द सुनते ही हँसती-खिलखिलती स्कूल जाती छोटी-बड़ी बच्चियों का चेहरा सामने आता है, जो चारो ओर प्यार, खुशियाँ बिखेरती, सबका सम्मान करती हैं और सबकी प्यारी दुलारी होती हैं |

“दो चोटी” दो पहाड़ियो की भी याद दिलाती है, जिनके बीच से दुनिया के अंधकार दूर कर प्रकाश फैलता हुआ सूर्या उदय होता है जो जन-जन में नव-जीवन भरता है | “दो चोटी” हिमालय की चोटियो की भी याद दिलाती है जो उज्वल, अटल और मनमोहक हैं |

“दो चोटी” चाहे वो उगते सूरज की हो, चाहे हिमालय की अथवा हँसती-गाती स्कूल जाती बच्चियों की - सभी चारो ओर प्रसन्नता, प्रेम, सौहार्द्य फैलती हैं | हिमालय की तरह अपने लक्ष्या मे अडिग, उगते सूरज की तरह ज्ञान का प्रकाश फैलती तथा बच्चियों की तरह निश्छल प्रेमवयी व विनम्रा, इसी प्रकार की शिक्षा देना “दो चोटी” का उद्देश्य है |